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इस कविता में इश्कमजाजी से इश्कहकीकी को जोड़ने की चेष्टा की गयी है नज़रों में खुद की माँ की गोद में दुनिया की पेड़ की छाँव में

Hindi 16 साल की उम्र में आतंकियों द्वारा अपने पिता को खोने का दर्द आज 50 की उम्र में भी जीवित है Poems